Monday, April 18, 2011

jii aapke liye !

जैसे बारिश से
मेहेक  उट्ठी माट्टी,
वैसे मेहेक उठे हैं हम, 
आपके आने पर |

आपकी आवज़ लेजातीहे हमें, 
न जाने कहाँ,
जहां भी हो ,
वही हे जन्नत हमारा |

इस बारिश ने फिरसे भिगोदिया 
हमें, आपही के यादों से |

मन करे, इसी वक्त 
दे जाएँ जान अपनी,
के जाते वक्त आपही के यादें 
लेजायें अपने सात |

ये बारिश भी ना?
है बहुत शरारत भरा,
देखोना ,
लेगाया  हमें एस दुनियासे दूर ...
मगर आपके पास |

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