Monday, October 10, 2011

A tribute to the king of Gazals!

जब भी दिल के घम बढ़ते   ..
तो उनकी ग़ज़ल ,
धूप में छाव की तरह ,
ज़ख़्म पे दावकी तरह ,
दुःख में दोस्तोंकी तरह , होते सात हमेशा  .. हर दीवाने के सात ...
हाय .. क्या करेंगे अब हम ... खो दिए अपने दोस्त को  ... 

जी, ये सच हें की
न मिले आज तक आपसे ...
फिर भी मान ते हें आपको दोस्त अपना  ... 

आपने तो यूंही तोड्दिया रिश्ता हमसे !
लेकिन यह वादा हें हमारा ... न भूलेंगे आपको 
जबतक रहेगी साँस हमारी |

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