जब भी दिल के घम बढ़ते ..
तो उनकी ग़ज़ल ,
धूप में छाव की तरह ,
ज़ख़्म पे दावकी तरह ,
दुःख में दोस्तोंकी तरह , होते सात हमेशा .. हर दीवाने के सात ...
हाय .. क्या करेंगे अब हम ... खो दिए अपने दोस्त को ...
ज़ख़्म पे दावकी तरह ,
दुःख में दोस्तोंकी तरह , होते सात हमेशा .. हर दीवाने के सात ...
हाय .. क्या करेंगे अब हम ... खो दिए अपने दोस्त को ...
जी, ये सच हें की
न मिले आज तक आपसे ...
न मिले आज तक आपसे ...
फिर भी मान ते हें आपको दोस्त अपना ...
आपने तो यूंही तोड्दिया रिश्ता हमसे !
लेकिन यह वादा हें हमारा ... न भूलेंगे आपको
जबतक रहेगी साँस हमारी |
No comments:
Post a Comment